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निवृत्ती महाराज किर्तन इंदुरीकर

निवृत्ती महाराज किर्तन इंदुरीकर, मेरा लंड तनकर फुफकाने लगा था ओर मैं इसे हाथ से पकड़ लिया मैं अपनी उत्तेजना को बश करने में सक्षम नहीं हो पा रहा था बकवास । निशानेबाजी की सलाहियात हर किसी को हासिल नहीं होती । रिवॉल्वर कोई गुलेल नहीं होती जो चलाने के लिए हर किसी को हासिल हो । वीर मेरे, ऐसे पैटर्न में गोलियां ऐसा मर्द भी चला सकता है जिसने पहले कभी रिवॉल्वर न थामी हो ।

फिर तो मैं बड़े सहज स्वर में बोला, जरूर वो लड़की तुम्हारी हमनाम और हमशक्ल होगी जो इसी पुनीत खेतान के ऑफिस में टाइपिस्ट हुआ करती थी । खाना खा कर जय अख़बार लेकर बेडरूम में चले गये और में रसोई के काम ख़तम करने लगी. रसोई के काम निपटाकर मैं बेडरूम में आई.

अंकल बोले की ऐसी ही प्रैक्टिस चालू रखो और अच्छा समय आने दो… जब हम इसको, बाक़ायदा मॉडलिंग की दुनिया में उतारेंगें… तब तक, इसकी कॉलेज एजुकेशन चलने दो… निवृत्ती महाराज किर्तन इंदुरीकर आवाज निकल रही थी। मैं उसकी बूर के बालों पर ऊली फिराते हुए उसकी बूर के हाठों के पास अपनी ऊंगली को कर दबाया । वह अपनी बूर के छेद पर ऊंगली का दबाव पाकर अपनी जंघाओं को छितरा दी।

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  1. उसकी गोरी बदन और चौड़ी छाती को देख हम एकदम से चोदने के लिए पागल हाने लगा। उस समय छाती तो जवान छोकरी की तरह तो नही थी। पर उसकी चुची काफी बड़ी सी लग रही थी। औरी गडा नहीं होने के कारण लज तो थी। पर हमें उसे समय वह चची इतनी अच्छी लगने लगी की उसके सामने जवान छोकरी की चुची भी फीकी लगने लगी।
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मामी के ब्लाउज के बटन धीरे धीरे खोलने लगा. कि इतने में मामी जाग गयी और मुझे इस हालत में देख कर चौंक गयी और जोर से चिल्लाई ! अरे मनीष ! तू यहाँ क्या कर रहा है? उन्हें अचानक समझ ही नहीं आया. फिर मामी ने देखा कि उनका घागरा उनकी कमर तक उठा हुआ है.

कैसे बताऊँ बताते हुए भी शर्म आती है। बस इतना बता सकती हूँ मेरे मामा ने मेरे साथ गलत काम किया, कहते हुए उनकी आँखें भर आयीं राज कभी तो माँ की जांघें चूमता और कभी उनके बालों को सहलाता- जोर से चूसो कोमल डार्लिंग.. उफ़्फ़ बहुत मजा आ रहा है.. और कस कर जरा..

निवृत्ती महाराज किर्तन इंदुरीकर,शाम 7:30 बजे के करीब प्रशांत मेरे केबिन में आया. फिर हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे.प्रशांत ने कहा कि क्या किसी अच्छे इंस्ट्रक्टर को कहा मैंने. मैंने कहा कि आपको कोई ज़रूरत नहीं है क्लास अटेंड करने की और न ही इंस्ट्रक्टर की, मैं आपको यहीं अपने ऑफिस में अपने लैपटॉप पे सिखा दूंगा.

मैं उनके चुत पानी का स्वाद डायरेक्ट लेना चाहता था इसलिए मैं ब्रेड हटाकर सीधा ककड़ी ढूंढ ढूंढ कर खाने लगा है जो अभी भी उनकी चूत के रस से गीली थी और उससे कुछ नमकीन सा स्वाद आ रहा था।

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और भुलक्कड़ भी । मादरजात अल्फ नंगी होकर जिस मर्द को एंटरटेन कर रही थी, उसे चंद दिन भी याद न रख सकीं ।

‘कैंची’, ‘रेजर’, ‘क्रीम’, ‘ऐसे करो’, ‘ऐसे पकड़ो’, ‘ये है’, ‘ये रहा’, ‘वहाँ बीच में’, ‘कितने गीले’, ‘सम्हाल के’, ‘लोशन’, ‘सपना-सा है’…………… वगैरह वगैरह स्त्री-पुरुष की,निवृत्ती महाराज किर्तन इंदुरीकर कोई दस मिनट बाद सुजन बाहर जाकर कुछ खाने पीने का सामान ले आया. तब तक मैं उस लड़की से काफी बातें कर चुका था.

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