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मैं दिन को घर में अकेली होती हूँ। बस घर का काम करती रहती हूँ, मेरा दिल तो यूँ पाक साफ़ रहता है, मेरे दिल में भी कोई बुरे विचार नहीं आते हैं। मेरे पति प्रातः नौ बजे कर्यालय चले जाते हैं फिर संध्या को छः बजे तक लौटते हैं। स्वभाव से मैं बहुत डरपोक और शर्मीली हूँ, थोड़ी थोड़ी बात पर घबरा जाती हूँ। माँ आते ही फ्रेश होने चली गयी माँ जब नहा के निकली तो माँ ने क्रीम कलर की साड़ी और ब्लाउज पहना था और क्रीम कलर की ब्लाउज जिसमे उनका सफ़ेद ब्रा दिख रहा था मुझे ऐसा लगा की इस वक़्त उनको पकड़ लूँ और चोद दूँ पर कंट्रोल किया क्योकि मेरी हिम्मत उतनी नही थी.

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झडने के बाद सब एक बार मूतने उठे रघू आगे चला गया मैं भी जा रहा था तो रघू बोला रुक मुन्ना, अभी मा को जाने दे

सुधीर- वाह क्या क़यामत लग रही हो.. आज तो क्यों इस बूढ़े पर सितम ढा रही हो.. ऐसे जलवे मत दिखाओ.. देखो लौड़ा हरकत में आ गया तुमको देख कर।psi होण्यासाठी काय करावे

दो-तीन महिने लग गये सब पहले की तरह होने में। इस बीच मै अक्सर चुदाई की किताबे पढता रहता था। एक दिन एक किताब हाथ उसको पढकर बहुत मजा आया। टयूशन जाने से पहले अपनी किताबो के बीच मे दबाकर जल्दी से टयूशन भाग गया, सोचा आगे की आकर पढूंगा। जब वापस आया तो ध्यान ही नही रहा। मा की चूत मे से सिर उठाते हुए मंजू बोली हाँ बेटे, ये रंडी तो आधे घंटे मे सीख गयी थी, मुन्ना भी उसीका चुदैल बेटा है, वो भी फटाफट सीख जाएगा देखना

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