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प्रेमाचे संदेश पाठवा

प्रेमाचे संदेश पाठवा, इसके बाद लाइफ रूटिन से चल रही थी,अब आरती रमण के आइ कॉंटॅक्ट से बचने की कोशिस करती थी.पर रमण अपना सारे का सारा कनसेन्रेशन आरती पर ही रखे हुए था,इसलिए वो कोशिस करता था कि कैसे आरती की कंपनी ज़्यादा से ज़्यादा एंजाय की जाए,पर अरविंद के डर की वजह से ज़्यादा कुछ नही कर सकता था. रुची ने पत्ते देखे, उसके पास 2 का पेयर था...अब इतना तो वो समझ ही चुकी थी की एक जैसे दो पत्ते आने पर वो चाल चलने लायक होते हैं, इसलिए उसने फ़ौरन हज़ार का नोट लिया और चाल चल दी..अपनी ब्रा से ढके मुम्मों से रगड़कर ..

अब आरती ने मनु के लंड को खींचना शुरू कर दिया था,क्यूंकी अब उसकी चूत बहुत गरम हो गयी थी,और उसको ठुकाइ की ज़रूरत महसूस होने लगी थी,और आरती चाहती थी कि अब एक बार मनु भी उसकी चूत का मज़ा ले ही ले.तो उसने मनु को अपने उपर आने का इशारा किया,मनु अपनी मा के इशारे को समझ कर आरती के उपर आ गया. 'हाँ पापा...बट मुझे बुरा नहीं लगता क्या...आप ही बताओ?' मनिका ने उनका सपोर्ट पा कर कहा 'मैंने भी कह दिया आज तो कि आपसे तो पापा अच्छे हैं और वो पता नहीं कैसे झेलते हैं आपको...’ और उन्हें बताया.

रुची (उसके लंड को पकड़कर उमेठते हुए) : शादी तो मैं तेरे साथ ही करूँगी और वो जब होगी, तब होगी...अभी के लिए तो मेरा उधार चल रहा है इसके साथ .....चल अब देर ना कर, बड़ी ज़ोर से लगी है चुदाई की प्यास...'' प्रेमाचे संदेश पाठवा इन सब बातों के बीच मे उन लोगों ने कोल्ड ड्रिंक ख़तम कर ली,फिर मनु ने कहा कि वो लोग मनु के कमरे मे चल कर बैठते हैं,और वो दोनो जने उठ कर मनु के रूम मे आ गये,मनु के रूम मे सारी की सारी सुवधाएँ मौजूद थी,जैसे कि डेस्कटॉप,लॅपटॉप ,स्टडी टेबल ,नेट कनेक्षन एट्सेटरा,एट्सेटरा.

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  1. जब मेरी वाइफ को होश आया तो वो बार-2 बच्चे से मिलने की ज़िद करने लगी,पर में उसे सच नही बताना चाहता था क्यों कि अगर में उसे बताता तो वो बर्दाश्त नही कर पाती.,!
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  3. उसकी आँखो की चमक बता रही थी की वो रश्मी को ऐसे पत्तो के खेल मे इंटरस्ट लेते देखकर कितना खुश हो रहा था...अब उसकी खुशी के पीछे मंशा क्या थी,ये तो वो ही जाने, पर उसकी बात सुनकर रश्मी भी हँसती हुई सी मोनू के साथ बैठ गयी और फिर शुरू हुआ जुआ. मनिका ने अपनी सहेलियों के साथ गुपचुप खिखीयाते हुए एक दो पोर्न फ़िल्में देखीं हुई थी लेकिन असली लंड से उसका सामना पहली बार हुआ था और वह भी उसके पिता का था. जयसिंह के भीषण काले लंड को देख उसका बदन शरम और घबराहट से तपने लगा था.
  4. प्रेमाचे संदेश पाठवा...नीलू - वो दोनों बच्चे आ रहे हैं न....तो काकी ने कहा की दोनों की जांच कर लेनी चाहिए...अभी दोनों काफी दिनों तक घर में ही रहेंगे...या हो सकता है की अब वो हमेशा ही हमारे साथ रहें...तो हमारे पास काफी समय है उन्हें सब कुछ समझा के उनकी जांच करवा लेने का..... एग्जाम पूरी होने के बाद मधु हितेश को लेकर कुछ दिन अपने पिता के यहां चली गयी, मनिका और कनिका ने बहाना बना लिया किसी तरह और फिर 15 दिन तक वो लोग घर में ही हर कोने में रंगरेलियां मनाते रहे
  5. 'थर्टी-फोर...' मनिका ने यह बिलकुल नहीं सोचा था कि उसे अपने फिगर का माप बताना पड़ेगा, उसका उत्साह थोड़ा ठंडा पड़ गया था. 'अच्छा भई मैं दूसरी तरफ मुहँ करके बैठ जाता हूँ अगर तुम कहती हो तो...' जयसिंह ने मुहँ दीवार की तरफ घुमाते हुए कहा.

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पर होनी को कौन टाल सकता था। जो हुआ सो हुआ। पर अब जयसिंह ने मन ही मन ये निश्चय कर लिया कि वो अपनी गलती का पश्चाताप करेंगे। वो मनिका से जितना दूर हो सकता है, रहेंगे।

(भानु बहुत खुश हुआ की रानी ने चुदाई की बात पर आपत्ति नहीं की बल्कि खुद ही उस तरह की बात करने लगी. भानु को लगा की अब उसका रास्ता साफ़ है. अब उसे और भी खुल खुल कर बात करनी चाहिए) .होल्ड दिस….. उसने अपनी पैंटी की पतली सी पट्टी को जिसने उसकी चूत को कुछ देर पहले ढँक रखा था……उसे मुझे पकड़ने के लिए कहा….

प्रेमाचे संदेश पाठवा,नीरज- अरे ऐसा ही कुछ समझ.. मेरी नहीं हमारी बोल भाई.. अब सारी जिन्दगी मज़े से गुजारने का समय आ गया है.. देख ये अख़बार देख..

ओह थैंक यू पापा कनिका उछलते हुए जयसिंह की गोद मे आकर बैठ गयी और अपने दोनों हाथों को उसकी गर्दन के दोनों ओर लपेट लिया

तो जब रमण ने आरती को बंधन से आज़ाद कर दिया तो पहले तो आरती ने बहुत गहरी-2 साँसें ले कर अपने आप को व्यवस्थित किया,फिर वो सोचने लगी कि ये रमण ने उसके साथ क्या किया तो उसका चेहरा शरम से लाल गुलाबी हो गया,वो रमण से बोली कि ये तुमने क्या किया तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसे किस करने की.हिंदी ब्लू पिक्चर वीडियो में

'ठक्क', दरवाजा बंद होने की आवाज़ आई. जयसिंह तैयार होकर मीटिंग के लिए चले गए थे. जाने से पहले उन्होंने मनिका को एक बार फिर बाहों में भर लिया था और कहा था, जयसिंह ने झट नज़रें मोबाइल में गड़ा लीं थी. पर कनखियों से उन्हें मनिका के सधे हुए क़दमों से कमरे में आने का आभास हुआ, और एक ही पल में वे आश्चर्य से भर उठे थे. उन्होंने मनिका की तरफ देखा.

भानु – यह बात मुझे भी कई बार फील हुई की कहीं लोग ऐसा न सोचते हों...फिर मुझे लगा की अगर सोचते भी होंगे तो क्या करना हमें..दुनिया का दिमाग है. जो चाहे सोचे.हम किस किस को समझाते फिरेंगे की क्या बात है और क्या बात नहीं है...

फिर अचानक से जैसे आरती को कुछ होश आया और उसने अपने आप को संभाला,और वो एक झटके से रमण से अलग हो गयी,रमण को भी झटका लगा और वो समझ गया कि आरती अभी इस सब के लिए तैयार नही है.,प्रेमाचे संदेश पाठवा मे: प्लीज़ पकड़ लो….वरना आज के बाद मे तुम्हे कभी बुलाउन्गा भी नही….प्लीज़. तुम्हे मेरा लंड पसंद नही आया…बोलो….

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