इंडियन सेक्सी एम एम एस

जुन्या गाड्यांचा बाजार

जुन्या गाड्यांचा बाजार, जब विजय मेरे निप्पल को मींजता तो मेरी आह निकल जाती। किसी मर्द से अपने मम्मों को दबवाते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था। विजय ने अपना लण्ड दोनों मम्मों के बीच रख दिया, और मजे से मेरे मम्मों को दबाने लगा और निप्प्ल के साथ खेलने लगा। तभी सारी खुशी ऑर ख्वाहिशो को किसी की नज़र लग गई ऑर मेरा हँसता हुआ चेहरा एक दम उदास हो गया,,क्यूकी सामने से

पता नही रिंकी ने क्या सोच कर नीचे अपना मुँह करके जीभ को बाहर निकाला और बड़े प्यार से उस बूँद को चाट लिया…. के पास टिका हुआ था,,,,हम दोनो एक दूसरे की नज़रो मे देख रहे थे तभी मैने अपने दूसरे हाथ से उसकी ज़ुल्फो

मालंबंती ने फिरसे मुझे गोद मे बिठा ने कहा और मैने पालती मार के उसे गोद मे बिठा लिया उधर नसरीन ने अपनी कमीज़ निकाल दी…. वाह क्या नज़ारा बन रहा था उसने कमीज़ निकाली और उसके वो मस्त संतरे जैसे दूध एक दम सख़्त अवस्था मे थे…. वो निपल्स अपने गुलाबी लाल रंग से मुझे मदहोश करने लगे… जुन्या गाड्यांचा बाजार अरुण भी तथास्तु कह कर उसकी टाँगो के बीच एक बार फिर सेट होता है और उसकी गान्ड के नीचे एक तकिया सेट करके उसकी चूत को उपर उठा लेता है….उसके बाद वो अपने जंग बहादुर को उसकी गीली पिंकी के मूह पर घिसने लगता है… जैसे कोई कसाई बकरे को हलाल करने से पहले अपने छुरे को धार दे रहा हो…

कॉलेज की लडकी के साथ

  1. माँ,,,मतलब कि तू सन्नी के लंड को ले सकती है क्यूकी तू उसकी माँ जैसी है लेकिन माँ नही ऑर मैं करण का लंड ले सकती
  2. मारता रहूं ऑर मैने भी वैसा ही किया ऑर भाभी की कमर को पकड़ कर अपनी स्पीड तेज करने लगा ऑर बीच बीच मे अपने उस्मानाबाद लाईव्ह न्युज
  3. धनंजय बिल पे करने काउंटर पे खड़ा था और हम टेबल पर बैठे उसका इंतजार कर रहे थे, कि तभी वहाँ 10-12 लड़के एंटर हुए, फुल ऑफ मस्ती नशे में झूमते हुए.. रही बात गुण्डों से पंगा लेने की, तो अगर वो बुरे काम के लिए अपनी जान का रिस्क ले सकते हैं, तो क्या हम एक अच्छे काम के लिए रिस्क नही ले सकते ?
  4. जुन्या गाड्यांचा बाजार...आज तुम तैयार होके कहीं जा रही हो क्या कविता,,,,,मैने डाइनिंग टेबल से ही कविता को आवाज़ लगा कर पूछा,,, क्या करूँ दीदी इतना टाइम हो गया इनको बाहर गये अब कब तक बैंगन के सहारे रह सकती हूँ ,,,10-15 दिन की बात
  5. अच्छे डॉक्टर थे ,,सन्नी ही भाभी को लेके गया था डॉक्टर के पास ,,ये बात भाभी ने खुद बताई थी मेरे को,,,इसलिए उन दोनो को भी लड़कियों की फीलिंग का आभास हो रहा था, लेकिन वो नेहा से बचना चाहते थे, आख़िर वो थी तो उनके जिगरी दोस्त की छोटी बेहन ही.

पुणे सोन्याचा आजचा भाव

फ़ौरन उन दोनो को विश्वा का नाम याद आया, उन्होने उससे बात की तुम सिर्फ़ अपने दो-तीन दोस्तों के साथ गाँव के बाहर छिप के नज़र रखना,

मे उसे बस मे बिठा कर आया, तो वो मेरे कंधे पर सर रख कर कितनी ही देर रोती रही, में उसे चुप कराता रहा, लेकिन सच तो ये था कि मेरा भी रोने का मन कर रहा था, लेकिन रोया नही वरना हम जुदा नही हो पाते, और कुछ ऐसा हो जाता जो हम दोनो के परिवारों की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो जाती. रही थी,,,,,डरा तो मैं भी हुआ था थोड़ा उदास भी था,,क्यूकी सोनिया एक चहरे पर उदासी मुझे अच्छी नही लगती थी,,ऑर

जुन्या गाड्यांचा बाजार,मेर इतना बोलते ही माँ ,,मामा ओर शोबा दीदी हँसने लगे,,,,,क्यूकी मैने सोनिया को चुड़ैल बोला था,,,,,,हम सब लोग तो खुश

मेरी छाती पर हल्के-2 रोएँ जैसे बाल आते जा रहे थे, तो उसकी उंगलिया जब बालों में फिरती तो बड़ा रोमांच जैसा फील होता मुझे.

उसकी झील सी गहरी आँखों में मैने अपने लिए एक श्रद्धा का भाव देखा, जो एक भक्त का अपने भगवान के प्रति होता है.ससुर बहू की सेक्सी

मैं बोला ठीक है........मुझे मंजूर है....पर मेरी एक शर्त है ...इन दोनो को मैं जब मन चाहे कभी भी, कही भी चोद सकता हू... मैं चोदु कोई और चोदे..... तुम्हे कोई मुसीबत नही होनी चाहिए.... मे- भूल कर भी इस घटना का जिकर किसी से मत करना यहाँ तक कि अपने परिवार में भी, बैठे बिठाए मुशिबत मोल लेने वाली बात होगी ये.

ही पल मे,,,,मैं खुद पर क़ाबू करता हुआ ज़मीन से उठा ऑर खड़ा हो गया,,,,इधर मेरा लंड भी पूरी ओकात मे खड़ा

मैने कहा- ठीक है, और धीरे-2 से लंड उसकी चूत में सरकने लगा.. पता नही प्रेग्नेन्सी की वजह से या और कुछ, उसकी चूत आज मेरे लंड को कुछ ज़्यादा ही पकड़ सी रही थी बड़ा ही मज़ा आरहा था..,जुन्या गाड्यांचा बाजार एक दम से नही थोड़ा तडपा तडपा कर,,,,,,वो तैयार है तेरे साथ सोने के लिए बट ज़रा प्यार से सोना तू,,,,जल्दबाज़ी करके नही,,,,

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