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आइसक्रीम वाले कार्टून

आइसक्रीम वाले कार्टून, मैंने यही सोचकर कि सो रही होगी दोबारा नहीं मिलाया। और बैड पर लेट गया। मुझे प्यास लगी हुई थी तो उठकर किचन में गया और पानी पीया और वापिस आकर फिर से एकबार फोन मिलाया। तभी ह्ज्बेंड ने मेरी चूची छोड़कर जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर अपना लम्बा और मोटा लण्ड मेरे होंठों पर लगा कर बोले- मेरी जान.. बुर पेलवाने से पहले अपने प्यारे लण्ड को चाट तो लो।

दवा तो रोज़ ही खाते है पर फ़ायदा क्या, हर बार की तरह आज भी फिसल गये. रजनी ने नामार्द ठाकुर की हँसी उड़ाते हुए कहा. तो मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से उनकी ओर देखा तो वो मेरा हाथ पकड़कर कमरे में लगे बड़े शीशे की ओर लाई और खुद कंघा उठा कर मेरे बाल सही करने लगी।

वह मेरे पीछे-पीछे वह मेरी लचकते चूतड़ों को देखते हुए अन्दर आ गया। मैं अन्दर आते समय यही सोच रही थी कि आज इसका पहला दिन है और आज ही इसने मेरी गदराई जवानी को जिस हाल में देखा है.. इससे तो जरूर इसका लण्ड खड़ा हो गया होगा। आइसक्रीम वाले कार्टून उसकी योनि की गर्मी पाकर लिंग पूरी तरह अकड़ गया और तान्या धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी। बहुत देर से मेरी और रूपाली की कामक्रीड़ा देखकर वो ज्यादा ही उतेजित थी, इसलिए जल्दी ही जोरों से मेरे लिंग के उपर कूदने लगी।

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  1. अब पहली बार मैंने उस लड़की को सही तरह से देखा था, काफी सुंदर थी और भरा हुआ बदन था। कपड़े बहुत ही सलीके से सही तरह से पहने हुए थे जिसमें से एक एक कर्व शानदार तरीके से दिखाई दे रहा था। उसे देखकर न तो ऐसा ही लगता था कि चालू है और न ही ऐसा कि सीधी-साधी है।
  2. मैंने किचन में जाकर देखा कि क्या है और क्या नहीं है। फिर मैं भाई साहब से बोली- मैं सब्जी लेने जा रही हूँ। फर्स्ट नाइट क्या होता है
  3. मैंने अपनी जीभ को बाहर निकाला और उसके योनि द्वार पर लगाकर अंदर की तरफ धकेलने लगा। परन्तु उसकी योनि बहुत ही टाइट थी, जीभ अंदर जा ही नहीं रही थी। उसने पजामी और टी-शर्ट पहन रखी थी। उसके कोहनियों के बल लेटने से मुझे उसके बूब्स के बीच की गहराई साफ दिखाई देने लगी। एक बार तो मेरी नजर उधर ही अटक गई, और मेरे पप्पू ने पेंट के अंदर अंगडाई लेनी शुरू कर दी। परन्तु फिर मैंने अपनी नजर हटाकर उसके चेहरे पर जमा दी। वो मुझे ही देख रही थी।
  4. आइसक्रीम वाले कार्टून...तभी घंटी बजी..मैंने जाकर दरवाजा खोला.. तो सामने एक बांका नौजवान हाथ में नाश्ते का पैकट लिए खड़ा था। वो मेरे को ऊपर से नीचे देखते हुए बोला- मेम साहब.. साहब ने ये नाश्ता भिजवाया है। यह उनका हमेशा का काम हो गया था। जब भी मैं उनके कमरे की साफ सफाई करती.. तो अक्सर उनकी गीली चड्डी मिलती और मैं भी उसे सूँघकर देखती.. पर मेरे दिल में जेठ जी के प्रति कभी गलत भावना या उनसे चुदने का ख्याल नहीं रखती.. मैं यह सोचकर रह जाती कि बेचारे को हाथ से करने के सिवा और क्या कर सकते हैं।
  5. ‘आह्ह.. मेरे राजा.. यह चूत तुम्हारी ही है.. फाड़ दो इसे.. आअहह ऊऊऊऊओ आआहह.. ज़ोर से.. और ज़ोर से.. चोदो..’ अब ह्ज्बेंड तेज़-तेज़ कमर हिलाते हुए मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे। मैं कमर और चूतड़ हिला-हिला कर लण्ड बुर में पेलवाते जा रही थी।

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मैने तो कई लंड लिए थे जिनमे अब तक नौकर का लंड सबसे मोटा दिख रहा था. मेरे अंदर शरारत सूझी कि मैं क्या करूँ?????. नौकर को पकड़ लूँ कि क्यूंकी उसका लंड देखकर मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गई. बाय्फ्रेंड से तो पहले भी चुदाई करवाई थी. अब नये और मोटे लंड के अनुभव का दिल करने लगा था.

और ऐसे ही देखते ही देखते हम दोनों की एक तेज ‘अह्ह्ह’ के साथ-साथ माया और मेरे सामान का पानी छूटने लगा और हम दोनों इतना थक गए कि उठने की हिम्मत ही न बची थी। मेरे तेज़ प्रहारों के कारण माया ने भी एक अनुभवी चुद्दकड़ की तरह मेरे लौड़े को मुँह फैला कर अपने होठों के कसावट की कैद से आज़ाद कर दिया। मानो कि अब मेरी बारी हो और उनके बालों के कसने से और लौड़े के तेज़ प्रहार से अब आवाज़ें बदल गई थीं।

आइसक्रीम वाले कार्टून,सोनल शरमा गई और अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया। मैं उसके बालों में हाथ फिराने लगा और ऐसे ही कब हमें नींद आ गई पता ही चला।

कुछ देर बाद मैं भी बाहर आई.. पर मेरी चुदास पूरे चरम पर थी इसलिए मेरी चूतड़ और कमर बल खा रहे थे। उस पर मेरे ह्ज्बेंड मेरे नितम्बों पर चिकोटी लेते बोले- क्या हुआ मेरी जान.. तबियत सही नहीं है क्या?

मैं जैसे ही मैं बिस्तर पर गई ह्ज्बेंड ने मुझे अपने से लिपटा लिया और मुझे सहलाने लगे। मैं डर गई कि अगर मेरी चूत छुएंगे.. तो कहीं जान न जाएं कि मैं क्या करके आई हूँ।भाई ने बहन की चूत मारी

मेरे लिंग की कठोरता, और मेरे गरम गरम रस को उसकी योनि भी सहन नहीं कर पाई और उसने भी अपना पानी बहाना शुरू कर दिया। मैं अभी भी तेज तेज धक्के लगा रहा था। जिससे मेरा और उसका रस एक पतली सी पिचकारी की धार की तरह बाहर की तरफ बैकफायर कर रहा था जो सीधा मेरी जांघों पर गिर रहा था। जिसका माया को बिल्कुल भी अहसास न था कि क्या हो रहा.. बल्कि वो भूखी शेरनी की तरह वासना की आग से तड़पती हुई मेरी गर्दन और छाती को चूसने और चाटने में लगी हुई थी।

मैं और सोनल आंटी की मालिश करते रहे। मेरी बार बार हंसी छूट रही थी, तो सोनल ने मुझको आंखों से डराकर चुप होने को कहा। पर थोड़ी देर बाद मेरी फिर से हंसी छूट जाती।

मैंः क्योंकि सांप के काटने पर दो दांतों के निशान होते हैं पर इसके पैर में अंगूठे की थोडी सी चमड़ी उखड़ी हुई थी। जिसका मतलब है कि सांप ने नहीं किसी और चीज ने काटा है।,आइसक्रीम वाले कार्टून वो फिर से मेरे लौड़े को जोर-जोर से चूसने लगी, जिससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और मेरे मुँह से ‘आआह्ह्ह्ह हाआअ’ की सी आवाज़ निकलने लगी।

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